#Holi
होली का वो दिन मैं कैसे भूलूं मुझे आजतक याद है तुम्हारे रंग में रंग गए।
उस समय तो मेरी बोर्ड की परिक्षा चल रही थी।
मैंने खुद को अपने रूम में बन्द कर रखा था पर मुझे यकीन था तुम्हारी शरारत भरी नज़र मुझे ही ढुंढ रही थी।
सब गली में बच्चे खेल रहे थे।सब तरफ रंग ही रंग खेलने में मस्त थे।
पर मुझे तो कमरे से निकलना नहीं था।
मुझे सबकी आवाज सुनने को मिल रही थी।
और एक एक बार खिड़की खोल कर देख भी रही थी।
क्या हुआ था मुझे बस जानना था कि कुछ देर बाद ही तुम बाहर आने को बोले कि देखो कौन आया है?
मैं भी तो पागल ही थी और कुछ समझ नहीं आया जैसे मुझे बहुत ही जल्दी थी तुमसे ही पहला रंग जो लगाना था तो मैं दरवाजा खोला और बाहर आ गई।
फिर तुमने तो मुझे एक रंग भरी बाल्टी पानी पुरा सर में डालकर खड़े हो कर देखने लगे और फिर मैंने बोला कि यह क्या किया तुमने जाओ बात नहीं करूंगी तुमसे।।
ये कहा और फिर तुमने मेरे गालों पर भी रंग लगा दिया मैं खुद को रोक नहीं पाईं और फिर क्या था मैं वहां से चली गई।
आज भी याद है मुझे वो होली और रंग।।
फिर शायद ही मैंने कभी किसी से भी रंग लगवाईं हो।
क्योंकि वो तो मेरा पहला रंग और पहला प्यार था।