उगते सूरज को नमस्कार करना
ऐ आदत है हर इंसान की
डुबते सूरज को भूल जाना
ऐ तो फितरत है हर इंसान की ।।
इसीलिए में कहेता हुं कि जबतक आपके पास कूच रहेगा
तब तक आपको हर कोई प्रणाम करेगा
जिस दिन आपके पास कूच नहीं रहेगा तब आपको हर कोई
भूल जाएगा क्योंकि ऐ तो दुनिया का दस्तूर है ।।
नरेन्द्र परमार ✍️