तुम्हें अगर ऐसे ही जाना तो आएं ही क्यों।
मेरी सांसो में समाएं ही क्यों।
ऐसी भी क्या बेरूखी थी मुझसे।
जो जाने की आहट भी सुनाएं ही क्यों।
मेरी हर घड़कन की बात सुनकर भी खामोश हो क्यों।
रूठे हुए हो ये तो बताया ही नहीं क्यों।
क्या खता थी मेरी यह जताएं ही नहीं क्यों।