प्रेम में बिछड़ने का दुःख स्त्री से पूछना
पुरुष कह नहीं पाएगा।
वो रखेगा दर्द, जुदाई का समेट कर खुद मैं,
मगर एक आंसू उसकी आंखो से बह नही पाएगा।।
तड़पेगा, भटकेगा दर-ब-दर इधर उधर राहों मैं,
लेकिन पूछो कैसे हो, तकलीफ मैं हूं कह नहीं पाएगा।
प्रेम में बिछड़ने का दुःख स्त्री से पूछना
पुरुष कह नहीं पाएगा।।