सबको हसाँती सब रिश्ते निभाती फिर बिना कुछ कहे गुमसुम हो जाती । बस उसके बेटी होने के अस्तित्व ने कर दी ये भूल। इतनी अच्छी, इतनी प्यारी, मासूम सी बच्ची के अस्तित्व को कि जाती है,मिटाने तैयारी। माँ, बहन, बेटी के रूप मे एक औरत कर रही अपने अस्तित्व को स्वीकार। किसी ने सच ही कहा एक औरत रिश्तो के चक्र मे उलझकर हर बार अपने अस्तित्व की कीमत चुकाती है। कभी कुछ अपने लिए नहीं मांगती, हमेशा एक औरत कि हैसियत से नहीं बल्कि माँ,बहन, बेटी बनकर जीती है ।उसने आज खुद के अस्तित्व को मिटा दिया है। यह बात थी बीते हुए कल के औरतो की अब उसने चिड़िया की तरह चहकना शुरू किया है। कोयल की तरह गाना शुरू किया है। वह अपने सपनों के लिए उड़ान भरना चाहती हैं। लगता है आज ही तो एक औरत ने औरत बनकर जन्म लिया है।