तु जिद कर फिर से जीने की
राह काटने की , मंझील पाने की,
फिर जागने,जगाने की, लक्ष्य पाने की,
उठा कोमलतारूपी तलवार और मार दे,
तु क्रोध, मोह, नफरत के बिजो को,
तु जिद कर फिर से जीने की।
हार कर फिर से संभलने की,
लक्ष्य से लड़ने की, लक्ष्य बड़ा करने की,
भोर को छिनकर रवि को निकालने की,
राह के काँटों को छाँटने की,
तु जिद कर फिर से जीने की।
सब कुछ खोकर फिर से पाने की,
छोड़ दे अब नफरत की राहे,
निश्चय कर खुद को बदलने का,
तु जिद कर फिर से जीने की।
होंसला कर खुद से लड़ने का,
कोशिश कर अब सबको जितने की,
फिर से एक नाम दीवार पर उखेर 'राज',
तु जिद कर फिर से जीने की।
भरत (राज)