*यह कैसी ऋतु आयी।*
चादर हिम की बिछी हुई है,
बसंत के द्वारे सखि।
पुनःशीत है दस्तक देती,
यह कैसी ऋतु आयी।१।
रिमझिम गिरती बौछारें हैं,
शीत करे मनमानी।
हिमपात है उपद्रव मचाता
यह कैसी ऋतु आयी।२।
खग कुल करलव शांत हुआ है,
शांत सभी फुलवारी।
ऋतुराज खड़ा,देख अचंभित
यह कैसी ऋतु आयी।३।
नन्हीं कोंपल झाँक रही है,
पुष्प बनूँ अभिलाषा।
सूर्य देव क्यों छुपे हुए हैं,
यह कैसी ऋतु आयी।४।
गगन बिहारी छुपते सारे,
कोठर में मतवाले।
तीक्ष्ण शीत से थर-थर काँपें,
यह कैसी ऋतु आयी।५।
विपल्व गायन शोर मचाता,
तड़ित करे गर्जन नभ,
चादर ताने खड़ा कुहासा,
यह कैसी ऋतु आयी।६।
सरसों की बाली भी काँपे,
सरसों पर है स्याही।
शांत सरोवर,शांत जलज है,
यह कैसी ऋतु आयी।७।
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नीरज असवाल