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*’इंसान ने वक़्त से पूछा…*
*”मै हार क्यूं जाता हूँ ?”*
*वक़्त ने कहा..*
*धूप हो या छाँव हो,*
*काली रात हो या बरसात हो,*
*चाहे कितने भी बुरे हालात हो,*
*मै हर वक़्त चलता रहता हूँ,*
*इसीलिये मैं जीत जाता हूँ,*
*तू भी मेरे साथ चल,*
*कभी नहीं हारेगा………..*
*साजिशें वो रचते है जिन्हें दुनिया मे कोई जंग जितनी हो...मेरी कोशिश तो बस दिल जीतने की होती है ताकि रिश्ता कायम रहे जब तक जिंदगी हो...!*
🙏 *प्रणाम* नीरज असवाल 🙏