में और मेरे अहसास
हम दोनो मिलते है
कही अकेले में,
और टपक पड़ते है ,
अश्क मेरे अहसास के।
बया हर मेरा दर्द कर ,
फिर घायल मेरी संवेदना होती,
बीन कहे ही , यह आंखे,
सवालों पर सवाल कर जाती,
जब में और,
मेरे अहसास मिलते,
अपने में बस खो जाते,
प्यार के मोती बिखर जाते।
भरत (राज)