बच्चे
उस दिन धूप में
स्कूल में
नए स्टूडेंट के रूप में
आया कोई मित्र
नहीं जाना वह
किसका है सुपुत्र
नहीं पूछी उनकी जाति
मुझे कहा काम आती
सिर्फ मेरे पास दो चीज थी
मेरे भूखे पेट की रोटी
और सामने मेरा भूखा मित्र
और क्या कर लिया बटवारा
खा लिया आधा आधा
क्योंकि नही थे फसे हम
लोभ, भेदभाव और अहम
के जाल में क्योंकि हम
भोले बच्चे थे । ~ Urvi