एक औरत के जीवन की सच्चाई
कभी-कभी लगता है औरत होना एक सजा है
ना पड़े तो अनपढ़ जाहिल पढ़ ले तो पढ़ाई का घमंड है ।
शादी ना करे तो बदचलन नकचड़ी है और
कर ले तो अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे ।
सब से मिलकर रहे तो चालाक, मिलकर ना रहो तो घमंडी ।
पढ़ लिख कर घर में रहो तो क्यों इतने साल और पैसे खोये,
कोई नौकरी करो तो 'पर' निकल आए ।
नौकरी का घमंड है ।
सहकर्मी से से बात करो तो चलता पुर्जा और ना करो तो छोटी सोच वाली ।
बड़ा लंबा चिट्ठा है साहब क्या कहे ? अच्छा है कि चुप रहे !
krishna rajput 💞