कहता है!प्यार करता है मुझसे,
और मेरे आंसुओं की वजह बन जाता है।
इतनी झूठी बातों में भी,
इश्क़ की मिठास ना जाने वो कैसे घोल पाता है।
शब्दों का जाल ही उसका ,
सबसे बड़ा हथियार नज़र आता है।
ना जाने इतनी झूठी बातें ,
वो कैसे मुझसे कर जाता है ।
बिन छुए अपने लफ्ज़ों में कैद करता हुआ,
इतना झूठा इश्क़ ना जाने कैसे वो मुझसे जता जाता है।
जानते हुए भी कि, हर बात उसकी
केवल एक धोखा ,एक फरेब ,एक चाल है,
तब भी सुनती जाती हूं;
समझ होते हुए भी
उसके इश्क़ में नासमझ बन इश्क़ निभाती जाती हूं।