कहीं पर फूल कहीं भाला हूं।
मैं अमृत जहर का प्याला हूं।।
खुद को इस तरह से संभाला हूं।
के अंधेरे से उगता हुआ उजाला हूं।।
अश्क की बूंदों से पिघलूंगा कैसे।
मै चिंगारीओं का पाला हूं।।
भले खंडहर हूं मैं वीराने का।
कभी पूजता था वो शिवाला हूं ।।
इक ताली नहीं है मेरी शहज़ाद।
हजार तालियों का ताला हूं।।