खंडरो के शहर में मेरा भी एक गांव था।
तेरे चाहने वालों में मेरा भी एक नाम था।
कौन सा गुनाह जो किया हमनें जो
तेरी एक झलक के तलबदार हो गए हम।
क्या पता दूरी इतनी बढ़ जाएगी।
अनजानो में से बेगाने हो गए हम।
गैरों में भी हम शामिल नहीं।
क्यों गड़े मुर्दे उखाड़ लेते हैं हम।