अल्फ़ाज़ कागज़ के मोहताज नहीं।
मैं लिखूं और तुम पढ़ो इतने बेकार नहीं।
ये वेदना और संवेदना का तांडव है।
कोई सागर की लहरें नहीं, आ के चली जाए।
एहसास का समंदर है यह मेरे अल्फाज।
जो गहराई से जिंदगी में उतर जाते हैं।
कभी फुर्सत से कलमा मेरी कब्र पर पढ़ लेना।
पता चल जाएगा मैं मरा नहीं जिंदा हूं तेरी रगो में।