ये इंसानो की वास्तविकता है की
दूसरों के बारे में नहीं सिर्फ अपने
बारे में ही सोच रहे है।
सभी अपने काम अपने हुनर,
अपनी मेहनत और अपने कारनामें की
तारीफ सोच रहे है।
हर किसी को बहम है की दूसरे
इनकी तारीफे सोच रहे है।
सच ये है दूसरे भी अपने काम
करते हुए यहीं सोच रहे है
कि लोग अपनी तारीफे सोच रहे है।
मैं सोच रहा हूं ये भी वही सोच रहे है
वो भी वही सोच रहे है,
तो इनके बारे में सोच कौन रहे है।