इंसान - सिर्फ और सिर्फ दिखावा करता है| इसे दिखावा करने से खुशी मिलती है ; ये ही खुशी जिंदगी है | इस खुशी के लिए ही इंसान सब कुछ करता है, हालांकि कुछ लोगो की ही मजबूरियां होती है ; बाकी सब दिखावा कर रहे है | इस खुशी के बिना इंसान निर्थक बन जाता है |
उसके जीने में कोई मज़ा ही नहीं |
उसे आनंद नहीं आता जीने में, अगर वो दिखाने के लिए करता है, तो उसे मज़ा आता है | आनंद आता है, इसलिए यहाँ जों कोई कुछ कर रहा है, दूसरों को दिखाने के लिए |
बस उसे दिखावा करने में खुशी मिलती है ; इस खुशी
लिए ही हर काम करता है |
इंसान को दिखावा करना चाहिए और ये होना भी चाहिए | इससे उसे आनंद मिलता है और आनंद के लिए तो इंसान जीता है |
बाहर से भले ही नहीं दिखाता, लेकिन अंदर से स्पस्ट रूप से दिखाने की कोशिश करता है |
इंसान दिखावा करता है - हक़ीक़त में यहीं जीवन है
दूसरों से अच्छा दिखने का,
दूसरों से अच्छा सुंदर होना का,
दूसरों से बेहतर बनना का,
दूसरों से ज्यादा पैसा कमाने का,
दूसरों से ज्यादा अच्छा लिखने का,
दूसरों से बेहतर खेलने का,
दूसरों से ज्यादा मेहनत करने का,
दूसरों से ज्यादा महंगी महंगी चीजे रखने,
यही दिखावा कर कर के जी रहा है |
इंसान यहाँ सिर्फ खेल रहा है |
कभी चीजों से, कभी पैसों से,
बस इन चीजों से खेलता रहता है|
चीजों को जोड़ जोड़ कर,
बस केवल एक दिखावा करने के लिए जोड़ रहा है |
ऐसा करने में उसे सिर्फ खुशी मिलती है,
बस इसी खुशी के लिए उम्र भर खेलता रहता है,
बस इतनी सी खुशी है कि मेरे पास वो चीज है कि
मेरे पास इतने पैसे है |
अंत में एक दिन मर जाता है |
ये ही इंसान का जीवन है |
© pawan kumar saini