👀🥀
में ऐसी एक मुलाकात चाहता हूं....
कैसी?
ऐसी जिसमे मिलने का वक्त निश्चित हो पर बिछड़ने का नही...
ऐसी जिसमे मुझे जो तुमपे पसंद है वो तुम पहनो और तुम्हे जो मुजपे पसंद है वो में पहनूं...
ऐसी जिसमें एक चांद आसमां में हो और एक चांद समान बिंदी तुम अपने माथे पर सजा के निकलो...
ऐसी जिसमे तुम्हारे हाथों की चूड़ियों का वो शोर मानो बहार की दुनिया के शोर को फीका कर दे...
ऐसी जिसमे तुम्हारे कानों की बालियां पूरे कायनात के लोगों का ध्यान तुम पर केंद्रित करने का काम करे पर उन सब को छोड़ कर तुम सिर्फ मेरे मेरे लिए सजो...
लगाऊं में काला टीका फिर बलाएं लूं तुम्हारी,
मानो खुदा को रिशवत दे रहा के जोड़ी यूंही रहे हमारी...
फिर हम इस खुले आसमान में निकल चले जहां मेरे कंधे पर तुम्हारा हाथ हो....
फिर एक नदी किनारे ठहरे ,
हाथों में हाथ डालकर बैठे,
आंखो में आंख डालकर बैठे,
थोड़ी बहुत बातें हो...
खत्म ना ये रातें हो...
तुम आसमां में उस चांद को देखो और में तुमको देखता रहूं और वो दूर खड़ा चांद चिल्ला चिल्लाकर मुझसे कहता रहे की,
चांद में हूं, मुझे देखो.... 👀🌙
चांद में हूं, मुझे देखो.... 👀🌙
चांद में हूं, मुझे देखो.... 👀🌙