कितनी दफा दिल ने चाहा
तुझे फोन करूँ
हजारो दफा तेरा नम्बर
मोबाइल स्क्रीन पर टाइप कर के हटा दिया
जी ने चाहा
तुझसे अपना दर्द बयाॅ करूँ
मैं रोऊ और खूब रोऊ
पर डर लगता है
मेरे आंसूओ को देख
कही तू टूट न जाए
जिस इन्सान में हिम्मत बहुत है
कही वो बिखर न जाए
जो मेरा हो के भी मेरा न था
और न हो के भी मेरा है
डर लगता है
कही वो भी रो न जाए
एक हसरत थी जमाने से मेरी
बनूँ तुम्हारी ताकत मैं
और इसी हसरत में
मैं कही टूट कर बिखर न जाऊ
डर लगता है अब
तुम्हारे बिन कही मैं मर न जाऊ।।
मीरा सिंह