ए शाम,,
एक अरसे से नही मिले हम,
अबकी बार आओ तो अपने साथ
वक्त थोड़ा ज्यादा लेते आना,
सुना है आज भी खूबसूरत लगता है सूरज ढलते हुए,
जमाना हो गया पंछी को घर लौटते देखें हुए,
हम तो खो गए बेशक इस दुनिया की भीड़ में,
सुना है तु आज भी मासूम हे बचपन की तरहे,
की बहुत वक्त हुआ तुम्हे निहारे हुए,
इस बार थोड़ा आराम,
थोड़ा सुकून,थोड़ा करार भी
साथ लेते आना,
की ए शाम,
अबकी बार आओ तो अपने साथ
वक्त थोड़ा ज्यादा लेते आना..
_प्रिया पटेल.