September भी गुजर ने को है...!! कुछ उम्मीदों के साथ,, कुछ बिखरे हुए
सुबह के सपनो के जैसा, कितना अच्छा लगता है नई सुबह को सोच के,
पर हर गुजरने वाला दिन सुकून नहीं देता,
उम्मीद तोड़ता है।। कितना अच्छा होता
जब नई सुबह के साथ बीता दिन भी साथ होता.. चंद लम्हे समेट के,
बरसात की बूंदों को खुद से स्पर्श कराके,, ये माह भी बीतने बाला है
और न जाने कितने माह निकलने को बेताब है,,
@shivaninany