यह कैसा हिंदी दिवस भाइयों,
यह कैसा हिंदी का रोना।
बच्चों को पैदा होते ही हम, मम्मी पापा सिखलाते हैं ।
बड़ों के पांव छूने की जगह, हाय हेलो बुलवाते हैं ।
हिंदी तो बन गई है, पढ़े लिखों का मात्र एक खिलौना,
यह कैसा हिंदी दिवस भाइयों यह कैसा हिंदी का रोना ।।
इंग्लिश स्टाइल में इंग्लिश खाना। इंग्लिश बार में इंग्लिश पीना।
इंग्लिश पलंग पर इंग्लिश में सोना। बाथरूम भी इंग्लिश का होना ।
यह कैसा हिंदी दिवस भाइयों, यह कैसा हिंदी का रोना ।।
हर हिंदी बोलने वाला इंग्लिश जरूर जोड़ता है।
चाहे दो चार शब्द ही जानता हो,
बोलना नहीं छोड़ता है।
दूध और छाछ को मिलाकर, जैसें बना दिया हो, कोई बिलोना।
यह कैसा हिंदी दिवस भाइयों, यह कैसा हिंदी का रोना ।।
समारोह हिंदी का, संयोजिका नाम इंग्लिश में बुलाती है ।
कलाकार हिंदी का,पर शायद हिंदी नहीं आती है।
महोत्सव हिंदी सिनेमा का, भाषण इंग्लिश में होना।
यह कैसा हिंदी दिवस भाइयों यह कैसा हिंदी का रोना।।
100 करोड़ हिंदी भाषी, 5 करोड़ इंग्लिश वासी।
लक्ष्मी चरण चुमती उनके, बनकर रहती उनकी दासी।
हीन भावना के इस बोझ को, हमें पड़ रहा है ढोना।
यह कैसा हिंदी दिवस भाइयों कैसा हिंदी का रोना।।
इंग्लिश बोलने वाला, यहां स्मार्ट कहलाता है ।
हिंदी बोलने वाला तो, अनपढ़ जाहिल समझा जाता है।
क्या राष्ट्रभाषा की अस्तियों को,
हमें पड़ेगा, जल्दी ही गंगा में डूबोना ।
यह कैसा हिंदी दिवस भाइयों।
यह कैसा हिंदी का रोना।।
हनुमान जैन "हनु" बैगवानी
विशाखापट्टनम