कभी किराना घर का भर कर देखो अपने गुरूर से नीचे उतर कर देखो..!
तुम बून्द हो जो छुपी है गहरी झील में मन करें तो झील से निकल कर देखो..!
नाज़ करते हो ख़ुदकी क़िस्मत पर कभी हथेली पापा की पढ़कर देखो..!
दौलत में पापा की हिस्से बराबर किये कभी मोहोब्बत पिता से बराबर करके देखो..!
वो घर में है तो तकलीफ़ होती है। वो जिसका पिता नहीं ज़रा घर उसका बंजर देखो..!
माँ कहती है पापा तुम्हारे दुश्मन नहीं यकीन ना हो तो खुद पापा बनकर देखो..!
@Aakash bharati