'इश्क़ जो आसान होता
पेड़ पर उगा लेती उसे,
'बांधकर सावन का झूला'
कजरी तुम्हारे संग गा लेती ...
जो वश में होता, उड़ के आना! !
"पखेरू बन, तुम तक जाती"
जब-जब तुम मुझसे दूर होते
बदलियों से संदेशा भिजवाती,
इक बात कहुँ तुमसे ?
बदरा के संग, तुम भी आना.
'सावन' का सौगात भी लाना"
डॉ अनामिका