वैसे तो अंग्रेज बहुत शैतान थे
परन्तु अपने समय में पक्के थे
नियम पालन में ईमानदार थे
फौजी नियम के और पक्के थे
औरत घर में अकेली हो
द्वार पर खड़े होकर
मंजूर था
बात करना और चले जाना
घूरना नहीं औरत को
तोड़ा नियम
दंड कठोर था
दंड फांसी था
औरत पर
अपराध ना
के बराबर थे
इसलिए
औरत का सम्मान था
(बिन भय प्रीत ना होय गोसांई)