मोहब्बत से दूर
मोहब्बत का शायर मोहब्बत से दूर भागता है
वो अब तुम्हें नहीं तुम्हारा एहसास मांगता है
सुख गया होगा वो फूल जो मैंने खत में दिया था
मुरझाया हुआ वो फूल अब सावन मांगता है
इश्क़ के ख़्वाब देखती आंखें सुलगती है
बुझा सको तो आओ, ये मन तुम्हें सावन मानता है
पलक झपकते ही बदल जाता है दृश्य
कोई जिंदगी को टूटा ख़्वाब तो कोई चमत्कार मानता है
भावनाओं की आलोचना करना है आसान
जिस पर बीती हो वो ही सच्चा दर्द जानता है
मोहताज नहीं ये दिल किसी की सहानुभूति का
तेरी अनुभूति ही बनेगी मरहम ये सच जानता है
भूल से भूल गया तो मुझमें मेरा क्या बचेगा
तुझपे नहीं तेरी यादों पे हक है मेरा ये तो दिल जानता है
पत्थर सा दिखता हृदय मेरा अंदर से रूई सा है
जिसको चाहा अंदर से, वो अंदर की बाते जानता है
शंकर को पूजा होगा तुमने अच्छे जीवनसाथी के लिए
अयोग्य हूं मैं तुम्हारे लिए ये सच भोला जानता है
मैं नहीं तो कोई और भरेगा मांग तुम्हारी
पागल दिल ये मेरा तुझे ही तो दुल्हन मानता है
शिद्दत से चाहना आता है हमें, पाना नहीं आता
तुम इश्क़ हो, कोई चीज़ नहीं, छीनना नहीं आता है
बिछड़ना, मिलना होता है उसके लिए जो होते है जुदा
जो हो यादों से एक, उसे कौन जुदा कर पाता है?
मोहब्बत का शायर मोहब्बत से दूर भागता है
वो अब तुम्हें नहीं तुम्हारा एहसास मांगता है