व्यस्त रहा शब्दालय में
मैंने कविताओं में
ईश्वर, को लिखा बोलते पेड़, झरनो का संगीत,
सूरज से चाँद, तक की दूरी बादलों, में छुपा
सीतारों, भरा स्वर्ग
एकांतवास, शून्य से शुरू हुआ था वो सफ़र,
प्रेम,और फूलों, को लिखा
बाकी लोग तो अपनी निकट दुनियाँ में व्यस्त रहें...
निक राजपूत -