कई रातों से सोई नहीं, लगता हैँ सब ठिक हैँ!
पर होता नहीं, कैसे समझाऊं अपने दिल को,
जो पास होता हैँ जख्म अक्सर वही दे जाता हैँ!
कभी खुद से,कभी हालातो से, तों कभी अपनों से,
किस किस से लडू,ये सोच सोच कर मेरी रातें और लम्बी होगयी!
कभी कभी लगता हैँ सारी दुनियां मेरे पास हैँ!
ये वहम भी अजीब बिमारी हैँ,
कभी कभी लगता अकेले बैठ कर तेज रो लूँ,
पर आँखों मे अब पानी कहाँ?
जिंदगी एक कहानी सी बन गयी जिसके हर पन्नों पर कुछ और होता हैँ!
थक गयी हूं बस नींद आजाये, ये सोच कर अक्सर सोती हूं, पर मेरी रातें हर रोज की तरह लम्बी हो जाती हैँ!
By 📝
sarwat fatmi