अब मोहोब्बत से इशारा नहीं हो सकता
चाहकी मुराद मै गुजारा नहीं हो सकता
मेरी आवाज़ आवाजोंमें दब जाती है
क्यों तुजे लगता है की तेरे सिवा कोई और सहारा नहीं हो सकता
खुदा का वास्ता दे कर भी इंसान प्यार से जुदा नहीं हो सकता
शम्मा पर जान लुंटा कर भी परवाना कोई खुदा नहीं हो सकता
अब तो ये आलम है की कहे दे तुमको
यकीं नहीं आता की ख़ामोश लफ्ज़ तेरे इश्क की दास्तान नहीं हो सकता
बेजान पथ्थर साँस लेकर भी हम जैसा हूर नहीं हो सकता,
नुमायां है की अब आपके जहाँ में कोई नूर नहीं हो सकता
खुदा ने खुद आ कर दी इम्तिहान इश्क़ की तब भी
खुदा हम जैसा आपके इश्क़ कभी चूर नहीं हो सकता
ये तय है मेरी जान, की अगर तू मेरे बराबर नहीं हो सकता
तो आज भी तू मेरे प्यार के काबिल नहीं हो सकता
अब तो एलान-ए-वक़्त ही बताएगा ज़माने को की,
तुझ पर तरस खाने के सिवा मेरे प्यार का जिक्र नहीं हो सकता