*लोगों को भरपूर सम्मान दीजिये,*
*इसलिए नहीं कि...*
*उनका अधिकार है, बल्कि इसलिए कि आपमें संस्कार है..*
*एक हल्का सा हवा का झोंका*
*जलते “दीपक” को बुझा सकता है*
*पर “अगरबत्ती” को नहीं,*
*क्योंकि जो “महकता” है*
*वही पूरा जीवन आनंदित रहता है,*
*और जो “जलता” है, वह खुद*
*बुझ जाता है।*