सजल
मात्रा भार -16+17
समांत- अल
पदांत - रहे
छाती में कुछ मूँग दल रहे......
छाती में कुछ मूँग दल रहे।
घर में बैठ सभी को छल रहे।
सेवा करने का दम भर के,
सबकी आँखों में अब खल रहे ।
हाथ जोड़ कर वोट-माँगते,
वोटर-धकया आगे चल रहे।
राजनीति के मँजे खिलाड़ी,
तानके-सीना तेल मल रहे ।
आश्वासन के धूल झोंककर,
खुद के घर में चूल्हे जल रहे।
दया-धर्म की बातें करते,
छत के नीचे गुंडे पल रहे।
नेतागिरी दिखाने खातिर,
टूटी-चकिया दालें दल रहे।
मनोजकुमार शुक्ल " मनोज "
👏👏👏👏👏👏