कुछ यादें, यादें ही होती हैँ!
कभी हसना तों कभी रूठ जाना!
कभी उसका प्यार से,मुझे मना लेना!
तों कभी गुस्से मे समझा देना!
खट्टी मिट्टी यादें ही तों हमें सताती हैँ!
कभी उसका हो कर भी ना होना!
कभी प्यार से बातें कर के भी,वो!
प्यार आँखों मे ना दिखना!
कैसी ये उलझन हैँ जो सुलझती ही नहीं!
कभी घंटो ये सोच कर निकल जाता हैँ मेरा!
के बात किस से करू!
अपनी दिल ❤️की बात किस से करू!
तेज़ रोउ या खामोश रहू, अपने दिल❤️ को कैसे समझाउ!
मोबाइल मे तेरी तस्वीर को देखु!
या तूझसे मिल कर अपनी हाले दिल❤️ बयान करू!
रुख हवाओ ने क्या मोडा!
मानो मेरी जिंदगी ही मुझसे रूठ गयी!
-sarwat fatmi-