उत्तम विद्या लीजिये , जदपि नीच पै होय ,
परो उपावन ठोर में , कंचन तजत न कोए I
उत्तम विद्या यदि किसी अयोग्य या नीच व्यक्ति से भी मिले, तो भी उसे लेने में संकोच नहीं करना चाहिए I
'परो उपावन ठोर में' - कंचन तजत न कोए'-
गन्दगी में पडे हुए सोने को भी कोई तजता नहीं है, उसे उठाने के लिए तैयार रहता है I
भावार्थ:
जो गुणी है, वो गुणी ही रहेगा, भले ही वो किसी अयोग्य जगह पर ही क्यूँ न हो I
हीरा काले पत्थरों के बीच पाया जाता है, कमल कीचड़ में भी खिलते हैं, और कांटे वाली झाड़ियों पर गुलाब के फूल लगते हैं I जहाँ गुण होंगे, उस जगह का महत्व अपने आप बढ़ जायेगा, भले ही वो कितना ही गन्दा स्थान क्यूँ न हो I