महाभारत कथा
'महाभारत' एक प्राचीन हिंदू महाकाव्य जिसकी रचना महर्षि वेदव्यास नः की थी । यह महाकाव्य मूल रूप से संस्कृत भाषा में है लेकिन आगे चलकर इसकाअनुवाद विभिन्न विद्वानों द्वारा अपनी-अपनी भाषा में किया गया है।
वैसे तो महाभारत की कथा में अनेको प्रसंग हैं लेकिन असली कथा तो कुरुक्षेत्र में ही शुरू होकर कुरुक्षेत्र में ही समाप्त हो गई थी । तो आईए कुरुक्षेत्र के उस युद्ध को कविताओं के माध्यम से जानते हैं ।
कविता -1
प्रथम दिवस - नौवां दिवस
बेटे ने बाप को मारा,
बाप ने बेटे के लिए प्राण,
मामा ने भांजे को बनाया स्वर्गवासी,
भांजे ने मामा का किया काम तमाम ।।
दुर्योधन युद्ध करता जीत की महत्वकांक्षा से,
और दुर्योधन को हर पल याद आती
रहती द्युतसभा ।।
अर्जुन करते युद्ध प्रतिशोध की हुंकार भरकर,
धृष्टद्युम्न मंडराता रणभूमि में गुरू द्रोण का
काल बनकर ।।
युद्धरत रहते पितामह अर्जुन से,
गुरु द्रोण करते प्रतिरोध धृष्टद्युम्न का,
और दूसरी ओर भीमसेन और दुर्योधन करते युद्ध
अविराम ।।
शुरूआति नौ दिनों के यही थे परिणाम ।।