सालों इंतजार का सौदा किया है
दिल को दीवाना कर ये वादा लिया है
मन की मंजिल का जो ख्वाब संजोया था
उस इबादत का आज साया मिला है।
रूह से बंधा रहा था एक घाव
वक्त के तकाज़े से वो मरहम मिला है
जीवन के गमों से थम गया था जो वक्त
उसे फिर से चलाने का मौका मिला है
सुबह की आहट से नींद खुल ने के बाद
दिल का एक अरमान मिला है
समंदर के किनारे चढ़ते सूरज का आज
ख्वाहिशों भरा पैगाम मिला है।
बाग के महकते फूलो का जो रंग खिला है
उड़ते पंछी ओ में भी कही वो अक्स मिला है
दुश्वार था ये जहांन बिना आरजू के
आज फिर आशा का वो नूर मिला है
कवि के जीवन से खो गई थी जो कविता
आज फिर वो खोया पन्ना मिला हैं ।
- HEER