" राज क्या है? "
( गजल )
राज क्या है बताते नहीं।
ख्वाब में रोज आते नहीं।
मैं लगाने गले को खड़ा;
दो कदम क्यों उठाते नहीं।
प्यार है बोलते थे सदा;
शोर मन में मचाते नहीं।
कान बेताब है सुनने;
प्यार का गीत गाते नहीं।
'तंग फीजा बनी है यहां;
होठ क्यों मुस्कुराते नहीं'।
मिलके ही रहेंगे भला;
आज Bन्दास जाते नहीं।
©✍️ " Bन्दास "
राकेश वी सोलंकी।
छंद/बंधारण : गा ल गा × ०३