साई
श्रद्धा और सबुरी सीखने, मै द्वार तेरे हु आइ
कश्ती मेरी है मझधार बिना तेरे, स्थिर नहीं, वो है डगमगाई
आश्रय देदे, शरण में तेरे मुझे अब ले ले, ओ मेरे साई
जानु नहीं, इस दो रंगी दुनियामें सच्च है क्या, और क्या है एक परछाई
कृपा बरसाना मुझपे, सदा साथ रहे तेरा, ओ मेरे साई
दिखता है स्वार्थ चहु ओर, विपदा जीवनमे है छाई,
अकेलापन है, जीवनमें है उदासी और कठिनाई
बस अब तू ही है सहारा, सब कुछ है तेरे हाथ, ओ साई ।
Armin Dutia Motashaw