लोग अक्सर कहते है की possitive रहो...
मगर कभी - कभी वक़्त ऐसा आता है possitive तो छोड़ो सही क्या है वो भी पता नहीं चलता,
इतनी उलझन मे फ़स जाते है की सुलझ ही नहीं पाते,
क्या करे, क्या ना करे, कुछ भी समझ नहीं आता है,
ऐसा लगता है की सब छोड़कर कहीं भाग जाए फिर यह सोच कर रुक जाते है की भाग कर क्या करेगे, क्युकी
कोई भी problems parmanent तो है नहीं...
तो जैसा चलता है वैसे चलने दो।
_Misss Chhotti