दिल ऐ हाल
कभी कभी दिल ऐ हाल लिखना चाहती हूँ
कलम कागज़ से एक गहरा नाता जोड़ना चाहती हुँ
जाना चाहती हूँ अपनी दास्तां की गहरायी में
और जाते जाते कही खो सी जाती हूँ
ये उम्मीदों के बोझ उतार फेकना चाहती हूँ
ज़िन्दगी की एक नयी आगाज़ करना चाहती हूँ
हर जर्रा जर्रा खुल के जीना चाहती हूँ
फ़क़त मुस्कुराहटें देके इस जहाँ से जाना चाहती हूँ
मुसाफिर हूँ इस सुख दुख के सफर की
फूलों के संग काटे भी रख चलने का हौशला रखती हूँ
होगा मेरा भी सपनो का आशियाना एक दिन
बस यही इल्तिजा क़ुबूल चाहती हूँ
बड़ी खूबसूरत है मेरे तसव्वुर की दुनिया
कभी इत्मीनान से बताउंगी
अभी तो दौड़ना है इस ज़िन्दगी की दौड़ में
भले मंज़िल मौत ही क्यों ना हो
लेकिन जाने से पहले तसव्वुर को हकीकत में बदल के दिखाउंगी
- अवंशिका सर्राफ
#kavyotsav -2