इल्तुत्मिश ने अपने शासन (१२३४-१२३५) के समय महाकाल मंदिर को नष्ट कर ज्योतिर्लिंग को मंदिर के पास ही बने "कोटितीर्थ कुंड" में फेंक दिया था।
जब मालवा पर मराठा शासकों ने शासन किया तब शूरवीर श्रीमंत राणोजी राव सिंधिया ने १७३२ में उज्जैन को पुनः स्थापित किया था। राणोजी महाराज ने श्री बाबा महाकाल ज्योतिर्लिंग को कोटि तीर्थ कुंड से निकाल, महाकाल मंदिर का पुनः निर्माण करवाया और महाकाल ज्योतिर्लिंग को मंदिर में दोबारा स्थापित किया।
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और ये जो कहते हैं ना कि "कालियादेह महल (केडी पैलेस) मुगलों ने बनवाया था। ये भी झूठ ही है। उस महल का निर्माण भी सिंधियाओं ने ही करवाया था।
(पांच सौ साल तक ज्योतिर्लिंग कुंड में पड़ा रहा।)
#जयमहाकाल 🚩