बिन माँगे मिल गये ,
माँगा तो दूर गये |
जब भाव नही थे
मन के आँगन मे ,
पाँव पसारे तुमने थे,
जगे जतन से ,
हॄदय से तन मे,
रोम रोम मे भरना था ,
जीवन तो जीवन साथ,
हमे तो संग अंग एक
मरना था |
अब लगता है ,
स्वप्न था क्या यह ?
सोई थी क्या जगी हूँ
अब क्या ? आखिर
है यह जगना क्या ?
क्रमशः