*******सच्चा प्यार की खोज********
एक बार श्री हरि विष्णु ने द्वापर युग में श्री कृष्ण कि अवतार में धरती पर जन्म लेते वक्त ये सच्चा प्यार कि ख़ोज किये थे,,,किउं की उनको मालूम था कि सच्चा प्यार करने वाले इस दुनिया में वहत् कम् पाये जाते हें। फिर भी सव् हमेशा प्यार कि जिक्र करते हें।
एक बार भगवान ने ख़ुद कि अपने परिवार और सहयोगि से ये कार्य शुरू किये,,,, उन्होंने पहले सव् के दिल् में घोमण्डं भर दिया। सव् अष्ट पत्नियां अपने अपने पति कि प्यार को लेकर गर्व करने लागे।ये प्रभाव नारद मुनि के उपर भी हुआ।
नारद मुनि, भगवान के पास मिले,,, ओर फिर बोले कि में में तुम्हारा अंश हुं फिर भी ये एहसास किउं हो रही हे? में तुम्हारा एक ही अति प्रिय भक्त हुं। लेकिन मुझे लगता हे कि तुम कुछ माया किये हो। जहां मेरी प्यार ओर भक्ति से मुझे गर्व आ रही हे।
भगवान थोड़ा हंस कर बोले कि नहीं नारद, तुम मेरी अच्छे भक्त हो फिर भी मुझे तुम से भी वहत् ज्यादा प्यार करने वाले इस संसार मे हें।
नारद मुनि पुछे कन् हे बो?
भगवान उनक वोले तुम्हें क्या लगता हे वो कौन हो रेही होगी? ,,,,,,, नारद मुनि वोले तुम्हारे अष्ट पत्नियां?
भगवान वोले तुम मेहलो में जाकर सव् महा रानीओं को ये वात बलो की मुझे एक वीमार हुई हे,,,,,जिसका इलाज उनके धोए हुए पेरो कि पानी मे ही सही हो सकता हे,,,,,, ओर एक सर्त भी साथ में वताना कि अगर में बो पानी पिऊंगा तो उन्हें नर्क दण्ड भी हो सकता हे ।।।
,,,,,,, नारद मुनि पहले रुक्मिणी के पास गये,, उन्होंने बले की ये सम्भव नहीं हे,,,कई पत्नी भला ऐसा कर सकता हे? मुझे नर्क दण्ड में भय नहीं हे लेकिन में अपनी पत्नी धर्म के खिलाफ जा कर में अपनी पेरो को धो कर बो पानी नहीं दे सकती।।
,,,,, फीर नारद मुनि ने जाम्बवती,,, सत्यभामा ऐसे कर के सव् महारानीयं को जा कर वोले,,,, लेकिन कई भी पेरो धो कर पानी नहीं दिये,, अपने अपने धर्म पर रुक गये।।।।।।
नारद मुनि सोच ने लगे की भगवान को इतने प्यार करने वाले पत्नियां सव् कुछ बात जान वुझ् कर् भी पानी नहीं दिये।।।
फिर् उनक याद आई कि अभी भी राधा के पास जाना बाकी हे,,,,,,, नारद मुनि राधा के पास जा कर पहुंचे और
भगवान कि वीमारी के वारे में वताये।।।।। राधा ओर कुछ ज्यादा वात ना सुन कर तुरन्त अपनी पेरो को धो कर पानी ला कर दिये ओर बोली मैं नर्क दण्ड भोगने के लिए तयार हुं,,,,,,,,,, लेकिन तुम तुरंत ये पानी उनके पास लेकर जाअ,,,,,,, में उनको जी ते जी नहीं पा सका अगर् मेरी मरने के बाद में अगर उनके काम मे आउंगी तो ये जिवन् मेरी सार्थक हो जाएगा,,,,,,,,,,, ।।।।
इतनी सी बात सुन कर नारद मुनि के आंख में आसूं आ गयी।।।बो भगवान के पास पहुंचे तो ओर कुछ पुछने के लिए नहीं वचा था।। ((सच्चा प्यार ऐसा ही होता हे))