॥कल शिव सोमवार- ब्रह्मदत्त॥
॥अथ सूर्य स्तुति पाठ ब्रह्मदत्त॥
॥कल शिव सोमवार- ब्रह्मदत्त॥
॥कल शिव सोमवार- ब्रह्मदत्त॥
जो भी साधक हर रोज उगते सूर्य के सामने बैठकर भगवान सूर्य की इस स्तुति का पाठ अर्थ सहित करता है, सूर्य नारायण की कृपा से
उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती है।
अगर इस स्तुति का पाठ कोई साधक लगातार एक माह तक करता है उसके जीवन में कभी भी समस्या रूपी अंधकार नहीं आ सकता।—ब्रह्मदत्त
साक्षात् दर्शन देने वाले भगवान श्री सूर्य आपको बारंबार प्रणाम नमन नमस्कार है ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी भक्तों का ॐ जय श्री सूर्य देवाय नमः-ब्रह्मदत्त ॐ श्री भास्कराय नमः ब्रह्मदत्त त्यागी
ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ की तरफ से सभी सूर्य देव भक्तों को शुभ रविवार इतवार संडे की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई ब्रह्मदत्त त्यागी एवं समस्त भक्तों की तरफ से
आओ स्तुति करें भगवान श्री सूर्य देव मंत्रों से
1- श्रणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवच॑ शुभम् ।
शरीरारोग्दं दिव्यं सव सौभाग्य दायकम् ॥
अर्थात- यह सूर्य कवच शरीर को आरोग्य देने वाला है तथा
संपूर्ण दिव्य सौभाग्य को देने वाला है।
2- देदीप्यमान मुकुट स्फुरन्मकर कुण्डलम।
ध्यात्वा सहस्त्रं किरणं स्तोत्र मेततु दीरयेत् ।।
अर्थात चमकते हुए मुकुट वाले डोलते हुए मकराकृत कुंडल
वाले हजार किरण (सूर्य) को ध्यान करके यह स्तोत्र प्रारंभ करें।
3- नेत्रे दिनमणिः पातु श्रवणे वासरेश्वरः ।।
अर्थात- मेरे सिर की रक्षा भास्कर करें, अपरिमित कांति वाले ललाट की रक्षा करें। नेत्र (आंखों) की रक्षा दिनमणि करें तथा कान की रक्षा दिन के ईश्वर करें।
4- भ्राणं धर्मं धृणिः पातु वदनं वेद वाहनः ।
जिव्हां में मानदः पातु कण्ठं में सुर वन्दितः ।।
अर्थात- मेरी नाक की रक्षा धर्मघृणि, मुख की रक्षा देववंदित,
जिव्हा की रक्षा मानद् तथा कंठ की रक्षा देव वंदित करें।
5- सूर्य रक्षात्मकं स्तोत्रं लिखित्वा भूर्ज पत्रके।
दधाति यः करे तस्य वशगाः सर्व सिद्धयः ।।
अर्थात सूर्य रक्षात्मक इस स्तोत्र को भोजपत्र में लिखकर जो हाथ में धारण करता है तो संपूर्ण सिद्धियां उसके वश में होती है।
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6- सुस्नातो यो जपेत् सम्यग्योधिते स्वस्थः मानसः।
सरोग मुक्तो दीर्घायु सुखं पुष्टिं च विद॑ति ।।
अर्थात- स्नान करके जो कोई स्वच्छ चित्त से कवच पाठ करता है वह रोग से मुक्त हो जाता है, दीर्घायु होता है, सुख तथा यश प्राप्त होता
प्रस्तुतकर्ता ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़