दिखावा और न दिखाई देना अगर गहराई से मंथन किया जाए तो बहुत कुछ स्पष्ट होगा। आईने में भी अक्सर हम वही देखते है जो हमारा मन देखना चाहता है। मन को अनुशासन में रखना एक तरह का सतत किये जाने वाला अभ्यास है। यह बेहद कड़ा अभ्यास है। 99 प्रतिशत लोग मन को अनुशासित करने में अक्सर असफल रहते है। और जीवन को केवल भौतिक तरक्की धेय मानते हुए गुजार देते है जीवन के अंतिम समय मे लगता है जैसे काफी कुछ छूट गया है।
आओ जीवन को समझें और जिये।