समझ समझ कर डूबे सयाने ...
समझने की समझ से पार हो जाऊँ
तो शायद चित्रहॎार हो जाऊँ ,
समझने की जिद ही तो चक्कर लगाये,
समझ समझ समझ दोहराये |
समझ ही रोज कहानी बनाये,
समझ ही आँखो का पानी बढ़ाये |
समझ ही लोभ का चूना लगाये ,
समझ ही कत्थे सी रंगत जमाये,
समझ पान सी जो भी इसको चबाये,
न खाया न निगला कहीं थूक आये |
समझ समझ किसी के न आये |