नन्हे बादल,घने बादल
आसमान में छाये बादल,
लघुता से प्रभुता पाये
सारे जग के प्यारे बादल।
रिमझिम-रिमझिम बर्षा आयी
मिट्टी में हरियाली लायी,
वीर- धीर बन घन टकराये
तड़ित चाल से हमें डराये।
आह, सुन्दर-सुन्दर घिर आये
आसमान को नीचे लाये,
बूँद-बूँद पर हम हरसाये
नदियों से आनंद दिलाये।
काले बादल,भूरे बादल
धरती को प्यारे बादल,
दीर्घ नींद से जग कर आये
अति उल्लास से बरसे बादल।
* महेश रौतेला