ब्रह्मदत्त॥ भगवान श्री गणेश आरती ||ब्रह्मदत्त
|| श्री गणेशजी की आरती ।।
श्री गणेश आरती मंत्र ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ x2
एकदन्त दयावन्त,चार भुजाधारी ।
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी ॥ x2
(माथे पर सिन्दूर सोहे, मूसे की सवारी॥)
पान चढ़े फूल चढ़े,और चढ़े मेवा |
( हार चढ़े, फूल चढ़े, और चढ़े मेवा ।)
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा ॥ x2
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ x2
अँधे को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥ x2
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ x2
( दीनन की लाज राखो, शम्भु सुतवारी ।
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥ x2 )
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ x2
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प्रस्तुतकर्ता ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
सभी श्री गणेश भक्तों को शुभ बुधवार की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं समस्त भक्तों की तरफ से...........गणपति पूजा में यूं तो कई मंत्र शामिल हैं लेकिन एक खास श्लोक को गणेश जी को प्रसन्न करने का आसान मार्ग माना गया है। इस मंत्र को बेहद प्रभावशाली माना जाता है।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
वक्रतुण्ड महाकाय मंत्र का हिंदी अर्थ
जिनका मुंह घुमावदार है। जिनका शरीर विशाल है, जो अपने भक्तजनों के पाप को तुरंत हर लेते है, जो करोड़ों सूर्य के समान तेजस्वी हैं, जो ज्ञान का प्रकाश चारों ओर फैला सकते हैं, जो सभी कार्यों में होने वाले बाधाओं को दूर कर सकते है, वैसे प्रभु आप मेरे सभी कार्यों की बाधाओं को शीघ्र दूर करें। आप मुझ पर अपनी कृपा दृष्टि सदैव बनाए रखें।...... ब्रह्मदत्त त्यागी
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➖🔱॥ जय श्री गणेश ॥🔱➖********
भगवान श्री गणेश की मंत्र स्तुति ब्रह्मदत्त
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1. श्री महागणपति प्रणव मूलमंत्र: ऊँ ।
ऊँ वक्रतुण्डाय नम: ।
2. श्री महागणपति प्रणव मूलमंत्र: ऊँ गं ऊँ ।
महाकर्णाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ।।
3. ऊँ गं गणपतये नम:
ऊँ श्री गणेशाय नम: ।
4. ऊँ नमो भगवते गजाननाय ।
ऊँ वक्रतुण्डाय हुम् ।
5. श्री गणेशाय नम: ।
महाकर्णाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ।।
6. ऊँ श्री गणेशाय नम: ।
ऊँ गं गणपतये नम:।
7. ऊँ वक्रतुण्डाय हुम् ।
ऊँ गं ऊँ ।
8. ऊँ हीं श्रीं क्लीं गौं ग: श्रीन्महागणधिपतये नम:।
ऊँ ।
9. हीं श्रीं क्लीं गौं वरमूर्र्तये नम: ।
ऊँ गं गणपतये नम:।
10. हीं श्रीं क्लीं नमो भगवते गजाननाय ।
ऊँ वक्रतुण्डाय हुम् ।
11. श्री गजानन जय गजानन।
ऊँ गं ऊँ ।
12. महाकर्णाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ।।
ऊँ ।
– गणेश गायत्री मंत्र
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात।।
– तांत्रिक गणेश मंत्र
ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरू गणेश।
ग्लौम गणपति, ऋद्धि पति, सिद्धि पति। करों दूर क्लेश।।
– गणेश कुबेर मंत्र
ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा।
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