होंसला रख...
गुजर जाऐगी ये अंधेरी रात जल्द ही होगा नया सवेरा..
फिरसे देखने को मीलेगा वो पक्षीओका प्यारा रैन बसेरा..
जितना तू सोचता है उतना भी गम नही तेरा गेहरा है..
होसला रख उम्मीद रख जिंदगीका हर पल नया है..
देख मत पीछे मुडकर पिछे तो बस यांदोका बसेरा है..
फिर भी न जाने क्यो तू गुजरे कलको सोचता है..
आगे देख लम्हे तुझे पुकार रहे है..
और तू चादर ओढे चुपचाप सोया है..
वक्त के साथ तू चलना सीख ले..
आंखो मे अपनी सपने सजा ..
उन्हे भी तू गौर से देख ले..
माना के ये जिंदगी कठिन बहोत है..
कभी हसती तो कभी रूलाती बहोत है..
लेकीन याद रख..
रोना जरूरी है हसने के लिऐ..
और हंसना जरूरी है जीने के लिऐ..