जब ये श्रृष्टि बनी तब के लोग ओर आज कल के लोगो मे बहुत अंतर आ गया है।
तब के लोग जब भगवान को सच्चे मन से याद करते थे तो भगवान साक्षात उनको अपने दर्शन देते थे क्युकी तब के लोगो के मन के भितर सच्ची भावना थी एक दूसरे के प्रति दया थी ,इसलिए भगवान उनको दर्शन देते थे।
लेकिन आज के जमाने में भगवान सिर्फ हमे मूर्ति के रूप में देखने को मिलते है ओर आज के जमाने के इंसान भगवान की मूर्ति के सामने सिर्फ अपने मतलब की प्राथना करता है,सिर्फ अपने बारे में ही सोचता है ,एक कागज के टुकड़े यानी कि रुपए के पीछे अपने अपनो के ही दुश्मन बन गए है।
आज कल के लोगो को देख भगवान जहा भी होंगे देख के सिर्फ उन्हे अफसोस होगा की मेने इंसान की रचना क्यों की।
मुझे लगता है एक दिन भगवान जरूर इस धरती पर फिर से आयेंगे , इंसानों को सबक सिखाने के लिए।