सभी हनुमान भक्तों को एवं शनिदेव भक्तों को शुभ शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई ब्रह्मदत्त त्यागी
🔔🔔श्री शनि चालीसा🔔🔔
🔱🔱॥दोहा॥🔱🔱
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥
जयति जयति शनिदेव दयाला करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै । माथे रतन मुकुट छबि छाजै ॥
परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ॥
कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिय माल मुक्तन मणि दमके॥1॥
कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करें अरिहिं संहारा ॥
पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन ॥
सौरी, मन्द, शनी, दश नामा भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥
जा पर प्रभु प्रसन्न हैं जाहीं। रंकहुँ राव करें क्षण माहीं ॥ 2 ॥
पर्वतहू तृण होई निहारत तृणहू को पर्वत करि डारत ॥
राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो। कैकेडहुँ की मति हरि लीन्हयो॥
बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चतुराई॥
लखनहिं शक्ति विकल करिडारा मचिगा दल में हाहाकारा ॥ 3 ॥
रावण की गतिमति बीराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई |
दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका॥
नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा चित्र मयूर निगलि गै हारा॥
हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवाय तोरी ॥ 4 ॥
भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलिहि घर कोल्हू चलवायो॥
विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु हे सुख दीन्हयों ॥
हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी॥
तैसे नल पर दशा सिरानी भूंजीमीन कूद गई पानी ॥ 5 ॥
श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई ॥
तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा ॥
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी बची द्रौपदी होति उघारी ॥
कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो ॥6॥
रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला ॥
शेष देवलखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई ॥
वाहन प्रभु के सात सजाना। जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना ॥
जम्बुक सिंह आदि नख धारी। सो फल ज्योतिष कहत पुकारी ॥ 7 ॥
गज वाहन लक्ष्मी गृह आवें। हय ते सुख सम्पति उपजावें ॥
गर्दभ हानि करै बहु काजा सिंह सिद्धकर राज समाजा॥
जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै मृग दे कष्ट प्राण संहारे ॥
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी चोरी आदि होय डर भारी ॥ 8 ॥
• तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥
लौह चरण पर जब प्रभु आवें। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावें ॥
समता ताम्र रजत शुभकारी स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी ॥
जो यह शनि चरित्र नित गावै । कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥१॥
अद्भुत नाथ दिखावें लीला। करें शत्रु के नशि बलि ढीला ॥
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ॥
पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत दीप दान दै बहु सुख पावत ॥
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥10॥
॥दोहा॥
पाठ शनिश्चर देव को, ब्रह्मदत्त की हों भक्त तैयार।
करतपाठ चालीस दिन होत वो नर भवसागर पार ॥